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AICTE का एलान 2022: B.Tech और B.E. में अब बिना JEE Mains के भी मिल सकेगा दाखिला

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AICTE का एलान :- अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (AICTE) ने इसके लिए सभी विश्वविद्यालयों और राज्यों को पत्र लिखा कर इसकी जानकारी दी है। इसमें इंजीनियरिंग प्रोग्राम के डिप्लोमा धारक, बीएससी डिग्री और इस क्षेत्र में वोकेशनल डिप्लोमा वाले छात्र आवेदन करने के लिए योग्य है।

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AICTE का एलान

इंजीनियरिंग में दाखिला लेने के लिए छात्रों को अब जेईई-मेन की अनिवार्यता नहीं रहेगी। अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (AICTE) ने आगामी शैक्षणिक सत्र शुरू होने पर बीटेक और बीई प्रोग्राम में दूसरे वर्ष से लेटरल एंट्री से छात्रों को दाखिला देने की सुविधा शुरू करने की घोषणा की है।

AICTE ने इस सम्बन्ध में सभी विश्वविद्यालयों और राज्यों को पत्र लिखा है तथा इसकी सूचना दी है। इसके लिए B.Sc Degree, इंजीनियरिंग प्रोग्राम के डिप्लोमा धारक और इस क्षेत्र में वोकेशनल डिप्लोमा वाले छात्र आवेदन कर पाएंगे।

अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (AICTE) के Adviser डॉ. रमेश उन्नीकृष्णन द्वारा भेजे गए इस पत्र में उन्होंने कहा है कि बीटेक और बीई के दूसरे वर्ष में अब लेटरल एंट्री से छात्रों को एडमिशन दिया जा सकता है। इस प्रक्रिया के लिए एआईसीटीई के द्वारा दाखिला पात्रता और नियम भी तय कर लिए गए हैं। इसके लिए तीन स्तर पर छात्रों की दाखिला पात्रता तय की गई है। यहां बीटेक और बीई प्रोग्राम में दाखिले के लिए बैचलर ऑफ वोकेशनल को डिप्लोमा इन इंजीनियरिंग और बीएससी डिग्री को उसके समकक्ष माना जाएगा।

पात्रता स्तर

  • जिन छात्रों के पास 2 या 3 वर्षीय डिप्लोमा है, वो छात्र इंजीनियरिंग और प्रौद्योगिकी की किसी भी ब्रांच में दाखिला लेने के लिए एलिजिबल है। इसमें सामान्य वर्ग के छात्रों के लिए 45 फीसदी अंक और अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति वर्ग के छात्रों के 40 फीसदी अंक होने जरूरी होंगे।
  • जिन छात्रों के पास B.Sc डिग्री है वो भी लेटरल एंट्री के माध्यम से दाखिला ले सकते हैं। हालांकि बीएससी डिग्री (45 फीसदी अंक) के साथ-साथ 12वीं कक्षा में गणित विषय की पढ़ाई होनी अनिवार्य है। इसमें भी अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति वर्ग के छात्रों के लिए 40 फीसदी अंक होने जरूरी है।
  • इंजीनियरिंग और प्रौद्योगिकी क्षेत्र में वोकेशनल डिप्लोमा वाले छात्रों को भी लेटरल एंट्री से दाखिला लेना का मौका मिलेगा। इसमें विश्वविद्यालयों को बाद में इन छात्रों के लिए ब्रिज कोर्स करवाने की व्यवस्था करनी होगी। इसमें इंजीनियरिंग, फिजिक्स, मैथमेटिक्स, ड्राइंग आदि पर विशेष कोचिंग या तैयारी करवानी होगी ताकि वे सामान्य छात्रों के साथ पाठ्यक्रम को अच्छे से समझ सकें।

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